पत्रकारों को स्वतंत्रता से काम करने से नही रोक सकती है पुलिस, बदसलूकीज करने वाले अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के खिलाफ की जायेगी पुलिस महानिर्देशक के पास लिखित शिकायत
संजय सारथी की रिपोर्ट।
कोरोना वायरस की महामारी से बचने के लिए पूरे भारत मे किये गए लॉक डाउन की वजह से रायगढ़ जिले के अंतिम ग्राम बाकारुमा में फसे हुए 250 मजदूरों को बाकारुमा के हायर सेकंडरी स्कूल में डॉक्टरी परीक्षण कर आगे निर्देश मिलने तक रखा गया है। जिसमे नवजात बच्चें,बुजुर्ग,महिला व पुरुष शामिल है। रोके गए मजदूरों को कल से हायर सेकंडरी स्कूल में रखकर उनके रख-रखाव व खाने की व्यवस्था की बात कही गयी थी परंतु सरकार के रख-रखाव व खाने पीने की सुविधा की वायदे के पोल बिल्कुल खोखले नज़र आते है। ये सब बात ग्रामपंचायत बाकारुमा सरपंच हेतराम राठिया व आस-पास के ग्रामीणों द्वारा भी बोला जा रहा है कि रोके गए मजदूरों को दूसरे जगह भेजने की मांग लगातार की जा रही है।की पिछले 24 घंटो में मजदूरों को आज दोपहर से लगभग 3:30 बजे एक बार खाना मुहैया करवाया गया। परंतु खाने में कीड़े के निकलने से फसे हुए सभी मजदूरों ने खाना खाने से इंकार कर दिया व कुछ देर के लिए वहाँ भगदड़ सी मच गई। मौके पर तैनात दो सिपाहियों ने तत्काल अपने बड़े सक्षम अधिकारी धरमजयगढ़ एस.डी.ओ.पी. सुशील कुमार नायक को घटना की सूचना दी। जिसके पश्चात एस.डी.ओ.पी. अपने दल बल के साथ मौके पर पहुँचे व सख्ती बर्राते हुए लगभग 5:30 बजे मजदूरों को फिर से वही खाना खिलाया गया। भूख से बिलखते मजदूर क्या नही करते मज़बूरन उन्हें वर्दी और डंडे के डर से वही खाना खाना पड़ा। लॉक डाउन में फसे मजदूरों को मिली खोखली सहायता की सच्चाई को उजागर करने जब जोहार छत्तीसगढ़ की टीम मौके पर पहुँची तो हम ने जो सच्चाई के लिए प्रशासनिक अधिकारी के बारे में सच्चाई की खबर चलाये गया था उस खबर की असर पर धरमजयगढ़ एस, डी, ओ ,पी,ने संवाददाता संजय सारथी को तिलमिलाकर वीडियो बनाने से मना कर दिया और कैमरा बन्द करवा दिया और अपने स्पोर्ट में काम करने की बात कहने लगे। और मेरे ऊपर दबाव बनाने के लिए मेरे संपादक से बात करने की बात कही गई इस बात से संवाददाता के आत्म सम्मान को ठेस पहुँची उनकी बातें सुनकर संवाददाता निराश होकर बाहर आ गए यह हम नही बोल रहे है इन सब चीजों का हमारी टीम के पास पुख्ता सबूत है। जबकि मुख्यमंत्री ने सभी जिले के कलेक्टरो व एसपी को सख्त दिशानिर्देश दिया है कि पत्रकारों के साथ बदसलूकी ना की जाए क्योंकि प्रेस काउंसलिग मेंभी मुख्यमंत्री सभी जिला के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को सख्त दिशानिर्देश दिए है कि पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना है पत्रकार भीड़ का हिस्सा नही है। पत्रकारों के साथ बढ़ती ज्यादती और पुलिस के अनुचित व्यवहार के चलते कई बार पत्रकार आजादी के साथ अपना काम नही कर पाते है। पुलिस जैसे भीड़ को हटाती है वैसे व्यवहार पत्रकारों के साथ नही कर सकती है किसी स्थान पर हिंसा या बवाल होने की स्थिति में पत्रकारों को उनके काम करने में पुलिस व्यवधान नही पहुँचा सकती है। पुलिस की पत्रकारों के साथ की गई हिंसा मीडिया की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन माना जाएगा जो उसे संविधान की धारा 19 एक ए में दी गयी है। ऐसा होने की स्थिति में बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों या प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध पुलिस महानिर्देशक के पास लिखित शिकायत की करूँगा
Comments