शिविर से गायब 250 लोगों की तहकीकात बंद दरवाजे के अंदर
आखिर क्यों बंद दरवाजे के अंदर जांच की गई और जानकारी पर महज कहा गया, जांच जारी है
संजय सारथी की रिपोर्ट।
बाकारुमा --- बाकारुमा अस्थाई राहत शिविर में पलायन कर अपने घर को जा रहे लोगों को रखा गया था वहीं इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आया और प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया जब रातों-रात शिविर में रह रहे करीब 200 से अधिक लोग गायब हो गए यह लोग कहां गए और क्यों वस्तुस्थिति की जांच के लिए रायगढ़ कलेक्टर यशवंत कुमार मौके का निरीक्षण करने पहुंचे थे। वहीं इस मामले को लेकर जांच के दौरान मीडिया से दूरी बनाकर रखा गया जिस पर सवाल उठ रहे है।
कोरोना वायरस को लेकर आज पूरा देश थम सा गया है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे बचाव के लिए एकमात्र रास्ता सोशल डिस्टेंसिंग यानी दूरी बनाकर रखने से यह बीमारी एक से दूसरे में ना फैले इसके लिए पूरे 21 दिन के लिए संपूर्ण भारत को ब्लॉक डाउन किया गया है। साथ ही इससे पीड़ित लोगों की पहचान कर उनका इलाज किया जा रहा है वहीं इससे बचाव हेतु लोगों को दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। जिससे यह वायरस आम लोगों में ना फैले इसके लिए अत्याधिक प्रयास किए जा रहे हैं। लॉक डाउन के दौरान हजारों लाखों लोग अपने घर से दूर होने की वजह से अन्य क्षेत्रों में फंसे हुए हैं वहीं हजारों लोग अब पैसे और खाने-पीने की दिक्कत होने के चलते पैदल ही अपने घर की ओर प्रस्थान कर रहे थे। ऐसे में इस लॉक डाउन का कोई फायदा नहीं निकलते देख लोगों को राहत शिविरों में रख उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने का दिशा निर्देश जारी किए गए था इसी कड़ी में सैकड़ों की संख्या में अपने गंतव्य को जा रहे लोगों को रोककर रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाकारूमा में अस्थाई शिविर बनाकर 250 लोगों को रखा गया था लेकिन रात के अंधेरे में यह सभी लोग गायब हो गए जिसकी सूचना मिलने पर रायगढ़ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक मौके की निरीक्षण हेतु बाकारूमा पहुंचे थे लेकिन इस प्रशासनिक कार्रवाई पर उस वक्त बड़ा प्रश्न चिन्ह लग गया जब जांच के दौरान मीडिया से दूरी बनाकर रखी गई और उचित जानकारी नहीं दी गई बस इतना कहा गया कि जांच की जा रही है ऐसे में इस कार्रवाई पर लोग अब सवाल उठा रहे हैं।
दूरी बनाना संदेहास्पद
रायगढ़ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक मामले की जांच हेतु धर्मजयगढ़ ब्लॉक के बाकारूमा स्कूल पहुंचे उनके आते ही मेन गेट बंद कर दिया गया और किसी को भी अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई ऐसे में अब लोगों द्वारा सवाल उठाया जा रहा है कि कहीं रायगढ़ कलेक्टर दोषियों को बचाने में तो नहीं लगे हैं जिसके चलते लोगों को एवं मीडिया से दूरी बनाकर रखी गई इस जांच के दौरान, वही रायगढ़ कलेक्टर के द्वारा जांच उपरांत मीडिया को सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई बस इतना कहा गया जांच की जा रही है।
ये कैसी तहकीकात
पूरे देश के लोग लॉक डाउन के बाद घर पर एवं राहत शिविर या जहां उन्हें सुविधा उपलब्ध है वहां रहकर कड़ाई से लॉक डाउन का पालन कर रहें है और प्रशासन भी लोगों से इस लॉक डाउन का पालन कराने में कमर कसकर लगा हुआ है ऐसे में लोगों तक जानकारी पहुंचने का काम मीडिया ही कर रहा है इस समय मीडिया की भूमिका अहम मानी जा रही है जिसे देखते हुए जहां पूरे देश की रोजमर्रा की जरूरत की प्रतिष्ठानो को छोड़कर सभी कुछ बन्द है केवल मीडिया संस्थान को खुला रखने और अपनी सुरक्षा करते हुए कार्य करने की छूट प्रदान की गई है जिससे लोगों तक जानकारी पहुंच सके लेकिन इस जांच के दौरान मीडिया को दूर रखा गया आखिर क्या राज छुपा रहें है रायगढ़ के उच्चाधिकारी जिससे चलते मीडिया को इस जांच के दौरान दूर रखा गया कहीं दोषियों को बचाने या फिर सच्चाई पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं ।
*कहां गए शिविर के लोग अब भी सवाल बरकरार*
लोगों के अचानक गायब होने सूचना पर रायगढ़ कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी जांच हेतु पहुंचे जरूर लेकिन जांच में क्या आया सामने इसकी जानकारी नहीं दी गई जिससे यह सवाल अब भी बरकरार है कि जो इस राहत शिविर में थे वे कहां गए अब यदि इस शिविर में रह रहे लोगों में से कोई इस कोरोना संक्रमण से पीड़ित हुआ तो वह और कितने लोगो के संपर्क में आकर उन्हें भी संक्रमित करेगा जिसके कारण यह लॉक डाउन किया गया वही जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है ।
संजय सारथी की रिपोर्ट।
बाकारुमा --- बाकारुमा अस्थाई राहत शिविर में पलायन कर अपने घर को जा रहे लोगों को रखा गया था वहीं इस मामले में उस वक्त नया मोड़ आया और प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया जब रातों-रात शिविर में रह रहे करीब 200 से अधिक लोग गायब हो गए यह लोग कहां गए और क्यों वस्तुस्थिति की जांच के लिए रायगढ़ कलेक्टर यशवंत कुमार मौके का निरीक्षण करने पहुंचे थे। वहीं इस मामले को लेकर जांच के दौरान मीडिया से दूरी बनाकर रखा गया जिस पर सवाल उठ रहे है।
कोरोना वायरस को लेकर आज पूरा देश थम सा गया है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे बचाव के लिए एकमात्र रास्ता सोशल डिस्टेंसिंग यानी दूरी बनाकर रखने से यह बीमारी एक से दूसरे में ना फैले इसके लिए पूरे 21 दिन के लिए संपूर्ण भारत को ब्लॉक डाउन किया गया है। साथ ही इससे पीड़ित लोगों की पहचान कर उनका इलाज किया जा रहा है वहीं इससे बचाव हेतु लोगों को दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। जिससे यह वायरस आम लोगों में ना फैले इसके लिए अत्याधिक प्रयास किए जा रहे हैं। लॉक डाउन के दौरान हजारों लाखों लोग अपने घर से दूर होने की वजह से अन्य क्षेत्रों में फंसे हुए हैं वहीं हजारों लोग अब पैसे और खाने-पीने की दिक्कत होने के चलते पैदल ही अपने घर की ओर प्रस्थान कर रहे थे। ऐसे में इस लॉक डाउन का कोई फायदा नहीं निकलते देख लोगों को राहत शिविरों में रख उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने का दिशा निर्देश जारी किए गए था इसी कड़ी में सैकड़ों की संख्या में अपने गंतव्य को जा रहे लोगों को रोककर रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाकारूमा में अस्थाई शिविर बनाकर 250 लोगों को रखा गया था लेकिन रात के अंधेरे में यह सभी लोग गायब हो गए जिसकी सूचना मिलने पर रायगढ़ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक मौके की निरीक्षण हेतु बाकारूमा पहुंचे थे लेकिन इस प्रशासनिक कार्रवाई पर उस वक्त बड़ा प्रश्न चिन्ह लग गया जब जांच के दौरान मीडिया से दूरी बनाकर रखी गई और उचित जानकारी नहीं दी गई बस इतना कहा गया कि जांच की जा रही है ऐसे में इस कार्रवाई पर लोग अब सवाल उठा रहे हैं।
दूरी बनाना संदेहास्पद
रायगढ़ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक मामले की जांच हेतु धर्मजयगढ़ ब्लॉक के बाकारूमा स्कूल पहुंचे उनके आते ही मेन गेट बंद कर दिया गया और किसी को भी अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई ऐसे में अब लोगों द्वारा सवाल उठाया जा रहा है कि कहीं रायगढ़ कलेक्टर दोषियों को बचाने में तो नहीं लगे हैं जिसके चलते लोगों को एवं मीडिया से दूरी बनाकर रखी गई इस जांच के दौरान, वही रायगढ़ कलेक्टर के द्वारा जांच उपरांत मीडिया को सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई बस इतना कहा गया जांच की जा रही है।
ये कैसी तहकीकात
पूरे देश के लोग लॉक डाउन के बाद घर पर एवं राहत शिविर या जहां उन्हें सुविधा उपलब्ध है वहां रहकर कड़ाई से लॉक डाउन का पालन कर रहें है और प्रशासन भी लोगों से इस लॉक डाउन का पालन कराने में कमर कसकर लगा हुआ है ऐसे में लोगों तक जानकारी पहुंचने का काम मीडिया ही कर रहा है इस समय मीडिया की भूमिका अहम मानी जा रही है जिसे देखते हुए जहां पूरे देश की रोजमर्रा की जरूरत की प्रतिष्ठानो को छोड़कर सभी कुछ बन्द है केवल मीडिया संस्थान को खुला रखने और अपनी सुरक्षा करते हुए कार्य करने की छूट प्रदान की गई है जिससे लोगों तक जानकारी पहुंच सके लेकिन इस जांच के दौरान मीडिया को दूर रखा गया आखिर क्या राज छुपा रहें है रायगढ़ के उच्चाधिकारी जिससे चलते मीडिया को इस जांच के दौरान दूर रखा गया कहीं दोषियों को बचाने या फिर सच्चाई पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं ।
*कहां गए शिविर के लोग अब भी सवाल बरकरार*
लोगों के अचानक गायब होने सूचना पर रायगढ़ कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी जांच हेतु पहुंचे जरूर लेकिन जांच में क्या आया सामने इसकी जानकारी नहीं दी गई जिससे यह सवाल अब भी बरकरार है कि जो इस राहत शिविर में थे वे कहां गए अब यदि इस शिविर में रह रहे लोगों में से कोई इस कोरोना संक्रमण से पीड़ित हुआ तो वह और कितने लोगो के संपर्क में आकर उन्हें भी संक्रमित करेगा जिसके कारण यह लॉक डाउन किया गया वही जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है ।

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